सबरीमाला मंदिर विवाद – धर्म या राजनीति

November 23, 2019 8:15 am Uncategorized Comments

भारतीय संविधान के अनुसार हिन्दु मंदिरो में स्थापित मूर्तियों को जुडिशियरी परसन का दर्जा दिया गया है। प्राण प्रतिष्ठित मंदिरों में मुर्तियो को जमीन आदि का मालिकाना हक भी प्राप्त है। उनके अपने अधिकार एवं नियम है। जो हिन्दु धर्म में आस्था रखते है उन्हे उन नियम कानूनो को मानना चाहिए, अगर हिन्दु धर्म में आस्था नहीं है तो मंदिर में जा कर क्या दर्शाना चाहते है। इस तरह के आंदेलन कर हिन्दु मान्यताऔं, संस्कृति और परम्पराओं को ठेस पहुचाने का उदेश्य ही नजर आता है। दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि धर्म के आधार पर व्यक्तिगत आस्था की स्वतन्त्रता केवल वहीं तक सीमित रहती है जब वह अन्य किसी के अधिकार क्षेत्र में बाधक ना हो। सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के विशेष नियम अन्य किसी के कार्यो में कोई रुकावट नही डालते है। इसलिए सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के विषय को पारसी महिलाओं के विवाहेतर अधिकार और बहावी मुसलमानो में Female Genital mutilation जैसी प्रथाओं से तुलना नहीं की जा सकती। क्योकि उन विषयों में जोर जबरदस्ती का मामला आता है।

भारत में कई ऐसे मंदिर है जहां पुरुषों का प्रवेश नहीं है, गुरुद्वारा में सर पर कपड़ा बांध कर जाया जाता है। सभी धर्मो में कई ऐसी मान्यताए है जिनका हटाना अच्छा नहीं होगा क्योकि उनके पिछे धार्मिक  मान्यताएं है और इनको छेड़ने से सिर्फ अशांति फैलती है। सबरीमाला मंदिर ऐसी ही पौराणिक मान्यताओं को दर्शाता है जिससे छेड़ छाड़ नहीं होना चाहिए। ऐसे कई लोग सामने आए है जिनका धर्म में तो विश्वास नहीं है और फिर भी इस मंदिर में प्रवेश करने की जिद कर रहे है। ठीक है आपका धर्म में विश्वास नहीं है लेकिन दूसरो के विश्वास को ठेस पहुचाने का अधिकार भी आपको नहीं है। हिन्दु धर्म में सभी देवी देवताओं को उनके मूल रुप में ही पूजा जाता है जैसे मथुरा में भगवान कृष्ण की पूजा बाल गोपाल के रुप में होती है क्योकि वे उसी रुप में वहां स्थापित हुए है। ठीक उसी प्रकार भगवान अयप्पा बाल ब्रह्मचारी थे इसीलिए उनकी पूजा पुरुषो द्वारा की जाती है। इन सभी बातों को लोगों को समझना एवं मानना होगा।

कहा जाता है कि मक्का मदिना के बाद सबरीमाला मंदिर विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ है। तो क्या इसकी परम्पराओं को मानने वाले जनमानस को ठेस पहुचाना सही है। सूप्रीम कोर्ट ने 7 सदस्यो वाली  संविधानिक बैंच को केस रेफर करके ठीक हि किया है। कोर्ट इन सभी विषयो को ध्यान में रखकर ही अपना फैसला देगी ऐसी हम आशा करते है।

Road to $5 trillion

August 26, 2019 6:15 am Uncategorized Comments

If we are concerned with the economic well-being of the nation, we have to focus on economic growth. Setting a target and working on a roadmap to reach it is the only way to success, and who knows this better than Prime Minister Narendra Modi. In 2014, when Modi came to power, he set up a performance matrix, which seemed far-fetched, but his tireless efforts hit the bull’s eye.

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अच्छा आर्थिक विकास ही अच्छी राजनीति है

June 26, 2019 5:43 am Uncategorized Comments

मोदी सरकार को अभूतपूर्व बहुमत के साथ सत्ता में वापस का मौका मिला है। मोदीजी न केवल भाजपा या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के निर्विवाद नेता हैं, बल्कि पूरे देश के एक लोकप्रिय नेता हैं। यह भी उम्मीद है कि 2020 तक एनडीए के पास राज्यसभा में भी बहुमत होगा और परिस्थितियां पिछली सरकार की तुलना में और अनुकूल होगी। जिसके कारण आने वाले समय में श्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में कई सुधारों को लागू करने के लिए एक माकूल वातावरण का निर्माण होगा।आर्थिक प्रबंधन के मामले में मोदी सरकार का पहला कार्यकाल बेहद सफल रहा। जीडीपी में वृद्धि, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण और भुगतान संकट को लेकर जरूरी पहल ऐसे ही कुछ सफल प्रयास हैं। मोदी सरकार का पहला कार्यकाल सिस्टम को साफ करने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में काम किया गया। व्यापक आर्थिक मापदंडों को अगर देखें तो वे सभी बहुत अच्छी स्थिति में हैं। मुद्रास्फीति लगभग 4.5% है। जीडीपी विकास दर उच्च पथ पर, लगभग 7.5% है। राजकोषीय घाटा 3.5% है। चालू वित्तीय खाता घाटा भी स्वस्थ है। जीडीपी के अनुपात में टैक्स संग्रह में भी सुधार हुआ है, जो अब 12% है।

मोदीजी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ मंत्र के साथ प्रधानमंत्री के रूप में पांच साल तक कड़ी मेहनत से अपने दायित्व को निभाया है। यदि हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो हमारी सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, किफायती घर, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक खर्च में वृद्धि हुई है। सरकार ने 115 जिलों को आकांक्षात्मक जिला घोषित किया है और 65000 गांवों को पिछड़े क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है और पुश मॉडल पर काम कर रही है। इन जगहों पर जिला कलेक्टरों को उज्ज्वला, उजाला, मुद्रा, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि सात प्रमुख सरकारी योजनाओं के हर लाभार्थी तक वितरण के लिए जिम्मेदार बनाया गया है ताकि संबंधित क्षेत्रों में प्रत्येक लाभार्थियों पात्र को इन योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।

जनसंघ के शुरुआती दिनों से ‘अंत्योदय’ हमारी विचारधारा रही है, जिसके तहत समाज के अंतिम व्यक्ति को लाभ देना हमारा लक्ष्य है। हमारे वित्तीय समावेशन कार्यक्रम को विश्व बैंक ने भी बहुत सराहा है। पहले कार्यकाल के अंत में मोदी सरकार 22 करोड़ लोगों तक अपनी योजनाओं के साथ पहुंची है, जिसमें समाज के सभी वर्ग शामिल हैं। इस कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी ने जाति और धर्म से ऊपर एक नया समर्थक वर्ग तैयार किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के इन करोड़ों लाभार्थियों से सीधे जुड़ने के आह्वान के वांछित परिणाम चुनावों में मिले हैं।

भारत का महत्वाकांक्षी मध्यम वर्ग आगे बढ़ रहा है, यह नयी अवसरों की तलाश और अच्छे जीवनयापन के रास्ते तलाश रहा है। यह मध्यम-आय वर्ग मांग बढ़ाने वाला और व्यवसाय स्थापित करने में सक्षम है। हम गर्व से याद करते हैं कि पिछले 2000 वर्षों के इतिहास में भारत और चीन ने लगभग 60%वैश्विक व्यापार पर प्रभाव किया था।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) तालिका में 77वें पायदान पर होना हमारे उन प्रयासों को रेखांकित करता है जिसके तहत विनिर्माण क्षेत्र और एमएसएमई क्षेत्र की परेशानियों को चयनित और हल करने का काम हमने किया है। ऐसे ही ई-आकलन व्यवस्था, प्रत्यक्ष कर ढांचे में व्यापक भ्रष्टाचार को दूर करने में प्रभावी साबित हो रहा है। यह प्रक्रिया को सुचारू करेगा और व्यक्तिपरकता को हटा देगा। इन सभी प्रयासों के माध्यम से करदाताओं के लिए प्रभावी कर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

जीएसटी का कार्यान्वयन एक बड़ा सुधार है। यह कर संरचनाओं जैसे केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों को समावेश करता है, जिसके परिणामस्वरूप उपभोक्ता के लिए अप्रत्यक्ष करों के दरों में कमी होती है, यह पंजीकरण, रिटर्न भरने, रिफंड आदि में आॅनलाइन उपायों के माध्यम से व्यापार करने में आसानी लाता है। यह प्रणाली उपभोक्ता के लिए विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों को कम करेगा, सरकार को अधिक कर संग्रह करने में सुविधा होगी, राजकोषीय व्यवस्था जीएसटीएन नेटवर्क के माध्यम से अधिक सुचारू रूप से प्रशासित होगा।

40 लाख रुपये तक के कुल वार्षिक आय वाले छोटे व्यवसायों को जीएसटी से छूट प्राप्त है। ऐसे ही 1.5करोड़ रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले लोग कंपोजिट स्कीम का लाभ उठाकर मात्र 1 प्रतिशत टैक्स देकर जीएसटी की औपचारिकताओं से छुटकारा पा सकते हैं।

पिछले 5 वर्षों में हमारी सरकार ने समस्याओं को हल करने के लिए संस्थागत तंत्र पर ध्यान केंद्रित किया है। आईबीसी, एनसीएलटी और अन्य कानूनी सुधार लागू किए गए। दिवालियापन और एनपीए का सामना करने वाली कई बड़ी कंपनियों में फंसे बैंकों के पैसों की समस्या को अब हल किया जा रहा है। मोदीजी ‘प्रगति’ कार्यक्रम के तहत अटकी हुई नई परियोजनाओं के पुनरुद्धार पर भी काम कर रहे हैं।

भूमि और श्रम देश के औद्योगिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए केंद्र सरकार भूमि मालिकाना रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर और भूमि पट्टे समझौते के लागू करने पर भी जोर दे रही है। यह भूमि के स्वामित्व को स्थापित करने में मदद कर रहा है। श्रमिकों के मोर्चे पर हम इस क्षेत्र के श्रमिकों को औपचारिक परिधि में लाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी श्रम शक्ति का 93% अनौपचारिक क्षेत्र में है।

इस क्षेत्र में काम करने वालों की स्थिति बहुत खराब है। यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और औद्योगिक अधिनियमों में सरलीकरण के माध्यम से सरकार ने भविष्य निधि (पीएफ), ईएसआई, नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा आदि को लागू करने का काम किया है।

किसान की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से हमारी कृषि नीतियां तैयार की जा रही हैं। एमएसपी को उत्पादन की लागत से 150 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को बीमा कवर मिल रहा है। हमारी आयात—निर्यात नीति यह सुनिश्चित करती है कि किसानों को उसकी उपज का बेहतर मूल्य मिले। सरकार ने कई अन्य पहल भी की हैं।

हमारे पास वर्ष 2024 तक 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लिए स्पष्ट नजरिया है। हम भारत को एक आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। श्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी आवश्यक कदम शीघ्रता से लिए जाए।

सरकार करदाता के पैसे के महत्व को समझती है, इसलिए चुनावों में कोई लोकलुभावन घोषणा नहीं की गई। ऐसे ऐलान केवल मुद्रास्फीत को खराब करते है। हमारा ध्यान हमेशा सरकारी खर्च की उपयागिता एवं दक्षता बढ़ाने पर रहा है। हमने अपने घोषणा पत्र में कृषि ऋण माफी की घोषणा नहीं की और फिर भी इतने बड़े बहुमत से जीत गए। यह हमारी सामाजिक कल्याण योजनाओं पर बेहतर लक्ष्यीकरण का ही परिणाम है।

आर्थिक संदर्भ में हम उच्च विकास दर के साथ कम मुद्रास्फीति वाली एक आदर्श स्थिति में हैं। हम मानते हैं कि अच्छा आर्थिक विकास ही अच्छी राजनीति है।

Modi 2.0 Challenges

June 4, 2019 11:56 am Uncategorized Comments

Modi Government has been voted back to power with an unprecedented majority. Modi is an undisputed leader of not only the BJP or the National Democratic Alliance (NDA) but of the whole country. It is also expected that sometime in 2020 the NDA will also have a majority in the Rajya Sabha as well, something which eluded it during its last term in the government. This puts the incoming government in a very comfortable position to undertake structural economic reforms. Under the decisive leadership of Narendra Modi, the incoming government will take all the necessary measures.
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आदरणीय नितिन गडकरी जी के साथ संस्मरण

June 1, 2019 10:43 am Uncategorized Comments

आदरणीय गडकरी जी से मेरा सम्बंध दिल्ली में जब वे भाजपा के अध्यक्ष बने सन 2009 में आया । तब मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता था।

उससे पहले भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नागपुर में हुई थी तब मैं वहां गया था जिस, प्रकार  की अभूतपूर्व व्यवस्था , कार्यकर्ताओं का सेवाभाव देखा तो प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। नागपुर की कार्यकारिणी से सभी पदाधिकारी प्रसन्न थे । गडकरी जी के व्यवस्था कौशल्य और कार्यकर्ताओं से स्नेह ने हमें आत्मविभोर कर दिया।

दिल्ली वे जब आए और अध्यक्ष बने तो लगा कि, नए व्यक्ति हैं कैसा स्वभाव है, कार्यप्रणाली कैसी है , कार्यकर्ताओं का आंकलन कैसे करेंगे लेकिन थोड़े ही दिनों में उंहापोह खत्म हो गई। कभी लगा नहीं कि महाराष्ट्र से आए व्यक्ति हमसे अलग हैं । उनके निवास पर कभी भी जाओ तो समयानुसार आथित्य बिना किसी ऊपरी बनावट के सबको प्राप्त था , कभी नहीं लगा कि हम छोटे कार्यकर्ता हैं अध्यक्ष जी से बालहट कैसे  कर रहे हैं।

राजनैतिक कार्यकर्ताओं की आकांक्षा और अपेक्षाएं हर वक्त रहती हैं। राजनीति में हमारी महत्वकांक्षा  का योगदान रहता है सत्ता में अपनी हिस्सेदारी की इच्छा के बारे में मेरे मन में कभी दुविधा नहीं रही । इसमें दो राय नहीं है कि नेतृत्व सभी के अपने आंकलन से सहमत नहीं हो सकता और उसके अपने समीकरण होते हैं। राजनीति में समीकरणों को साधने की मजबूरी भी होती है लेकिन गडकरी जी से कहने में कभी हिचक नहीं हुई। मना करने के बाद भी प्रेम उसी प्रकार बना रहा, व्यवहार का खुलापन ,सभी से मित्रभाव, अपनापन उनकी विशेषता है।

उनके साथ काम करने में ऐसे कई मौके आए जब उनके व्यक्तित्व ने मुझे प्रभावित किया। श्री श्री रविशंकर जी से मेरा व्यक्तिगत सम्बंध है। जब आर्ट ऑफ लिविंग ने एक विशाल कार्यक्रम जर्मनी में आयोजित किया तो उनकी इच्छा थी कि गडकरी जी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते वहां मुख्य अतिथि के रूप में आएं। गडकरी जी को निमंत्रण देने के लिए मैं और डॉ. गुप्ता गए उन्होंने सरलता से स्वीकार कर लिया। जब हम लोग जर्मनी गए तो इनके सहयोगी वैभव जी इनके साथ नहीं गए। गडकरी जी ने अपनी टिकट खुद ही ली थी मैंने भी अपनी टिकट खुद ली । तीन दिन हम वहां साथ रहे। बर्लिन पंहुचते ही होटेल पंहुचकर इन्होंने कहा मैं पराठे,  अचार और कच्चा प्याज लाया हूं तुम मेरे कमरे में आ जाओ खाना खाएंगे। मैं कमरे में पंहुचा बनियान लुंगी में इनके साथ खाना खाया । मेरे लिए सुखद आश्चर्य था । सांयकाल हमने कार्यक्रम में भाग लिया और रात्रि भोज में भी गए।

गडकरी का पैशन था कि जर्मनी की एथेनॉल टेक्नोलॉजी के कार्य को देखें वहां के अम्बेस्डर से मिल कर उस टेक्नोलॉजी को इतने उत्साह से जानने और समझने की उत्सुकता थी कि इन्होंने पूरा दिन इस विषय पर लगाया। देश की एनर्जी की और गन्ना किसानों की समस्याओ को कितने अच्छे तरीके से हल किया जा सकता है इसी पर पूरा फोकस था।

जब हम बाजार गए, वे अपने परिवार के लिए समान खरीद रहे थे मुझे कहा गोपाल तुम भी कुछ लो मैं झिझक रहा था पर इंसिस्ट करने पर मैंने अपनी छोटी बेटी के लिए एक कपड़ा लिया , मेरे बहुत कहने पर भी पैसे मुझे नहीं देने दिए। “मेरी भतीजी है उसके लिए मैं उपहार दुंगा”, अभी तक मेरी छोटी बेटी को वह गिफ्ट याद है मेरा कोई बहुत पूर्व परिचय नहीं था लेकिन इनका अपनापन बहुत था।

भारत आकर कोई कार्यक्रम करना है तुरंत प्रोत्साहन मिलता था, कार्यक्रमों का मुझे शौक है, वैचारिक गोष्ठी ,एक्टिविस्ट मीट , सोशल इश्यूज पर पॉलिसी इंटरवेंशन आदि इन्होने कभी भी हमें रोका नहीं।

नई दिल्ली में हमने प्राकृतिक संसाधनों पर दो दिवसीय अधिवेशन किया था ,पूरे देश से लोग आए थे । मुझे याद है कि उद्घाटन सत्र में गडकरी जी ने बोला  “Politics has to be the means to socio-economic transformation Politics has to be a by-product of your  social Activity”  यह वाक्य आजतक मुझे याद है। मेरे अपने विचार से कितना सामंजस्य लगा, जैसे मेरे अव्यक्त भावों को अभिव्यक्ति प्रदान कर दी हो ।

सड़कें बनानी है , देश का आर्थिक विकास करना है , गरीबो के कल्याण में रत रहना है । कई बार हम आपस में मजाक भी करते थे गडकरी जी के पास जाएंगे तो Ethanol और सड़क की बात जरूर होगी । आज भी उनका इतना ही Enthusiasm  इन विषयों पर है और उस पैशन का मूर्तरूप देश के सामने है। बढ़िया सड़कें , उन्नत राज्य इनके ध्येय वाक्य की तरह है। ये हरदम Quote करते हैं कि  “American Roads are good not because American is rich but America is rich because American roads are good”।  मैं आर्थिक विषयों से जुड़ा हुआ हूं लेकिन मुझे विश्वास नहीं होता था कि विकास के लिए संसाधनों की कमी कभी नहीं होती। लेकिन गडकरी जी कहते हैं कि आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण चाहिए संसाधन आ जाएंगे। आज कई कई लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट के प्रोजेक्ट को गड़करी जी ऐसे पूरा करा रहे हैं जैसे कोई अपना घर बना रहा है।

मेरे जीवन के पचास वर्ष पूरे होने पर मैं एक रात्रि भोज का आयोजन ग्रेटर नोएड़ा में करना चाहता था और इन्हें आमंत्रित किया इन्होंने स्वीकार ही नहीं किया बल्कि उस दिन नागपुर में आवश्यक कार्य आ जाने पर भी वहां से आकर ग्रेटर नॉएडा के मेरे कार्यक्रम में आकर अपने आश्वासन को पूरा किया।

जब उनके भाजपा  का अध्यक्षीय कार्यकाल पूरा हो रहा था और निश्चित था कि पुनः अध्यक्ष बनेंगे उस वक्त लॉ कॉस्ट हाउसिंग के इनके नागपुर के प्रोजेक्ट को देखने का हमारा कार्यक्रम तय हुआ था, दुर्भाग्यवश इन्होंने अध्यक्ष पद अस्वीकार कर दिया। अगले दिन हम साथ में नागपुर गए, कार्यकर्ता दोगुने उत्साह से एयरपोर्ट पर लेने आए थे । एयरपोर्ट से अपने घर भोजन के लिए ले गए उनकी पत्नी एवं बिटिया ने भोजन कराया। इन्होंने कॉपरेटिव के तहत कई हजार लॉ कॉस्ट हाउस बनाए थे, उन प्रोजेक्टस को पूरा दिखवाया । पूरा कार्यक्रम यथावत रहा कहीं कोई तनाव या उदासीनता नहीं थी ।

पानी के विषय पर मैं काफी कार्य कर रहा हूं । पानी के निजीकरण एवं व्यवसाईकरण पर मेरा विरोध है, लेकिन विचारों की भिन्नता पर भी  मेरे काम को रोका नहीं। इनका सोचना है कि वैचारिक आधार पर समय की आवश्यकता को देखते हुए हमें अपने को संक्रीणता में नहीं अवरूद्ध करना है । निजी सम्पत्ति की देश को विकास के लिए आवश्यकता है।  निजीकरण करना ही चाहिए यह निजी निवेश को प्रोत्साहित करता है इसी सोच के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग, जलमार्ग आदि में बिना संसाधनों की सीमितता के हम तीव्र विकास देख रहे हैं। अभी हाल में गडकरी जी ने कहा कि “मैं वर्कहोलिक हूं जिस काम को करता हूं उस पर ही पूरा ध्यान देता हूं । पिछले पांच सालों में एक भी ऐसा काम नहीं है जो मैंने कहा हो और नहीं किया हो । एक जगह उन्होंने कहा कि मैंने कई ठेकेदारों से कहा कि यदि उनके द्वारा बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता खराब निकली तो मैं उन्हें बुलडोजर के नीचे डलवा दूंगा” । उन्होंने पारदर्शिता पर चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि किसी ठेकेदार को ठेकों के लिए दिल्ली आने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जो सड़क निर्माण दर यूपीए के शासनकाल में दो किमी प्रतिदिन हो गई थी अब वो 37 किमी प्रति दिन हो गई है उनके अनुसार जिस तरह एनडीए सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में सड़क नेटवर्क पर अच्छा काम किया उसी तरह दूसरे कार्यकाल में पानी के नेटवर्क को सुधारा जाएगा

संसाधनों की सीमितता के कारण आधारभूत ढांचे में निजी निवेश की आवश्यकता और महत्व को उन्होंने कभी भी अस्वीकार नहीं किया। आज देश में एक सफलतम मंत्रालय का पिछले पांच वर्ष में संचालन किया I feel that Really he is the man of the moment and men for the all the Moment .  उनके विचारों में एक ताजापन है , एक बेबाकी है, शब्दों को कभी तोड़ मरोड़ कर नहीं कहा और व्यक्ति एवं समय देखकर कभी बदला नहीं। मुझे खुशी है कि ऐसे व्यक्तित्व के साथ मेरा सम्बंध रहा। इनसे बहुत कुछ सीखा, इनकी जीवन इसी प्रकार लक्षित बना रहे। जीवन के उतार चढ़ाव से अन उद्देलित, अपने मार्ग पर मुक्तसर अग्रसित  आदरणीय श्री नितिन गडकरी जी एक निष्ठावान कार्यकर्ता हैं अपनी जिम्मेदारियों को सकुशल निभाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। समाज की समस्याओं का गहराईयों से चिंतन और उसके निदान के मार्ग का अन्वेषण और अगर मार्ग स्पष्ट हो गया तो फिर उस पर तीव्र गति से बिना झिझक अग्रसर होने का गडकरी जी का स्वभाव बन गया है और यहीं उनकी सफलता की कुंजी भी है। सब समाज को लिए साथ में आगे है बढ़ते जाना।

There is no dearth of talent in BJP, which is evident from our election and governance management

May 30, 2019 11:27 am Uncategorized Comments

I don’t agree with the talent deficit claim in the ministry. After five years in power, we are much better placed with more experienced individuals in our party. With more than 300 members of Parliament in Lok Sabha and with 50 from our NDA partners, there is ample talent across the spectrum from different segments of society and geography. Read More >

Economic Agenda for New India

May 27, 2019 5:51 am Uncategorized Comments

In 2014 when Mr. Modi came to power there were several challenges; India has a large no of population below poverty line, elimination of poverty in absolute terms is an important issue. The second was; large scale leakages in the delivery mechanism of government’s social security schemes. There were gaps in the tax compliances. Macroeconomic parameters like inflation, fiscal deficit, GDP growth rate were in unhealthy terrain. Concentration of wealth is a big concern. In the last five years, Mr. Modi has been successful in addressing some of these issues; others are part of our unfinished agenda. Read More >

Good Economics is Good Politics

May 25, 2019 5:50 am Uncategorized Comments

Q1. The country is facing a challenging economic situation: a slowdown threatens, unemployment is at historic highs and manufacturing is at a standstill. How does the BJP propose to deal with the situation if it comes to power? What should be its top priority?

Answer 1. It is wrong to say that the country is facing a challenging economic situation. If you look at  themacro economic parameters they all are in a very good shape. Inflation is under control at around 4.5%. GDP growth is on a higher growth path, and is about 7.5 %. Fiscal deficit at 3.5% is under control. Current account deficit is also healthy. Tax to GDP Read More >

टाइम मैगजीन का दुष्प्रचार – भारत की प्रजातंत्र का अपमान

May 21, 2019 7:41 am Uncategorized Comments

अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन में आतिश तासीर ने पीएम मोदी पर एक लेख लिखा। जिसमें लेखक तासीर की तरफ से सवाल हुआ है कि, क्या विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र फिर से मोदी को पांच साल का मौका देने को तैयार हैं?

आतीश तासीर नें मोदी जी को डिवाइडर इन चीफ बताया और मोदी जी की जम कर आलोचना कि हालांकि उन्होने यह भी स्वीकारा है कि 2019 के इलेक्न में मोदी जी की जीत तय है। तासीर ने मोदी जी को विभाजित सोच का बताते हुए कई बातों को रखा है पर क्या वो बातें सही है।

नरेंद्र मोदी की (अपेक्षित) जीत को वे “भारत के लिए विपत्ति” के रूप में वर्णित करते है। अगर वह वास्तव में भारतीयों द्वारा लोकतांत्रिक, स्वतंत्र और निष्पक्ष जनादेश का सम्मान करते हैं, तो उनका यह विचार प्रजातांत्रिक मुल्यो के खिलाफ है और भारतीय जनमानस की सोच पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करने का प्रयास करता है।

अगर तासीर के इस लेख का अवलोकन किया जाए तो इस लेख में इस बात का जिक्र है कि पिछले 5 सालों में मोदी अपनी नाकामी छुपाने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा लिया है। लेकिन अगर पिछले पांच वर्षों में मोदी जी का कार्यकाल देखेगें तो देश में सर्वांगीण विकास के कई महत्वपूर्ण कार्य हुए है। आज हमारी अर्थव्यवस्था विश्व में सबसे तेज गती से आगे बढ रही है। आधारभूत ढांचा जैसे सड़क, रेल, हवाई जहाज के क्षेत्र में विशेष प्रगति हुई है। गरीब कल्याण और उत्थान बहुत तेजी से हुआ है। भारत में आज मिडल क्लास का उद्भव हो रहा है जो नई सोच एवं आत्मविश्वास के साथ आगे प्रगति पर है। विश्व पटल पर भारत की साख बहुत मजबूत हुई है।

लेखक ने इन प्रगति को नजरअंदाज करके 1947 का जिक्र किया है। वे कहते है कि भेद भाव की भावना तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने शुरु की थी। देश का विभाजन हिन्दु और मुसलमान के तर्ज पर हुआ था। पाकिस्तान ने अपने को मुस्लिम राष्ट्र घोषित किया लेकिन भारत धर्मनिरपेक्ष रहा। नेहरु जी द्वारा फिर, भारत में मुसलमानों और हिन्दुओ को दो अलग – अलग कानून अपनाने को क्यों कहा गया। मुसलमानो के शरिया को समान नागरिक संहिता के उपर रखा गया और हिन्दुओं के कानून में कई बदलाव किये गए।

उनका कहना है मोदी जी के कार्यकाल में हिंदू-मुस्लिम के बीच दूरियां बढ़ी, जबकी मोदी जी ने हिन्दु मुसलमानो में कभी भेद भाव पैदा करने की कोशिश नही की है मोदी जी ने“सबका साथ सबका विकास” से सबको समान रुप से फायदा पहुंचाने का प्रयास किया है।

तासिर ने तीन तलाक को खत्म करने का जिक्र किया है। एक तरफ आप यह कहते है। महिलाओ के लिए सुरक्षा नहीं है। तो फिर यह बताईए क्या तीन तलाक को खत्म करना मुसलिम महिलाओं का विकास का हिस्सा नहीं है। मुसलिम महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए या नहीं है।

वह इस तथ्य की अनदेखी करते हैं कि नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के समर्थकों ने शाह बानो के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को निष्प्रभावी कर दिया और डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि अल्पसंख्यकों का देश के संसाधनों पर पहला अधिकार है।

धार्मिक संघर्षों पर भी, उन्होंने इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया कि पिछले पांच वर्षों में भारत में कोई बड़ी घटना नहीं हुई थी। महिलाओं के मुद्दों पर, वह महिला सशक्तीकरण के लिए विभिन्न सरकारी पहलों, जैसे बढ़े हुए प्रसूति मातृत्व अवकाश, छात्राओं के लिए अलग शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन आदि सरकार की पहल की अनदेखी की हैं। उज्जवला योजना से गाँव धुएँ मुक्त की तरफ़ बढ़ रहे हैं, कच्चे मकानों में रहने वालों को पक्के मकान दिए जा रहे हैं, ये सब योजनाएँ बिना किसी जातिगत भेदभाव और बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लागू की जा रही हैं और इन योजनाओं की ख़ासियत है कि जो सुपात्र हैं वो इन योजनाओं के लाभार्थी हैं। भारत जैसे विशाल देश में किसी योजना को उसके सच्चे हितग्राही तक पहुँचा देना ख़ुद में एक कामयाबी है|

मैं प्रश्न पूछता हूँ कि देशहित और राष्ट्रवाद में फरक क्या है। क्या देश हित की भावना जगाना गलत है। क्या देश के नागरिकों में यह भावना नहीं होनी चाहिए की देश सर्व प्रथम है।

मोदी जी ने आतंकवाद पर लगाम लगाई है। पुलवामा के बाद दिखा दिया कि पाकिस्तान कि हजार घाव वाली थ्योरी को नहीं सहेगें। हमारी सेना पाकिस्तान को उसके घर में घुस कर मारेंगी।

मोदी जी ने स्वतंत्र देश का हर फैसला कैसे होता है इसको पुरी दुनिया के सामने रखा है।

और तासीर जी बताए क्या पहले की अपेक्षा भारत में विकास कम हुआ है। आप कांग्रेस के विकास को कतार में लाइए जिसने 70 साल देश पर राज किया और फिर मोदी सरकार के विकास को कतार में लाइए आपको फरक साफ दिखाई देगा। आपने भारत को समझने के लिए सलेक्टिव अप्रोच का चयन किया है आप अपने लेख में निष्पक्ष पत्रकार कम नज़र आते हैं आपके विश्लेषण पर आपके पूर्वाग्रह भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

महागठबंधन का ढोंग और मोदीवाद के विरोध का हौआ

May 15, 2019 5:48 am Uncategorized Comments

नरेंद्र मोदी से बेइंतेहा नफरत के कारण साथ आए और अपने राजनैतिक अस्तित्व के लिए लड़ने को मजबूर विभिन्न विपक्षी दल, बिना किसी साझा नीति या विचारधारा के, खुद को ‘महागठबंधन’ का नाम देकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी को इस महागठबंधन का केंद्र माना जा रहा है लेकिन दूसरे राजनैतिक दल उसके नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं। राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण उपस्थिति रखने वाली सारी पार्टियां भी महागठबंधन में शामिल नहीं हुई हैं। इससे स्पष्ट है कि एनडीए के खिलाफ संयुक्त रूप से एक विपक्षी उम्मीदवार खड़ा करना जितना मुश्किल हो रहा है उतना पहले कभी नहीं हुआ।

अगर हम मतदाताओं के मामले में सबसे बड़े राज्यों से शुरू करें; उत्तर प्रदेश जहां समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए गठबंधन किया है लेकिन इसमें कांग्रेस नहीं है। पश्चिम बंगाल में कुछ शुरुआती बातचीत के बावजूद ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना नहीं है और कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के बीच वाकयुद्ध जारी है। दिल्ली में माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) कांग्रेस के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करेगी, इसलिए उनके बीच भी किसी प्रकार के गठबंधन की संभावना नहीं है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) लेफ्ट डेमोक्रेटिक अलाइंस के खिलाफ खड़ा है और राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद तो लेफ्ट और कांग्रेस के बीच लड़ाई और भी तेज़ हो गई है और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी यही हाल है। कांग्रेस असम में बदरुद्दीन अज़मल के संगठन के साथ भी गठबंधन करने में विफल रही है। इन सभी राज्यों में त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला होगा, जिससे महागठबंधन का कोई औचित्य ही नहीं रहेगा। इन 8 राज्यों में लोकसभा की 226 सीटें हैं।

हालाँकि, कांग्रेस खुद को एक राष्ट्रीय पार्टी कहती है लेकिन बिहार में महागठबंधन की मुख्य सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) है और कांग्रेस को 40 में से सिर्फ नौ सीटें दी गई हैं, जबकि बाकी सीटें उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी और मुकेश साहनी जैसे नेताओं के छोटे दलों को दे दी गईं। तमिलनाडु की 39लोकसभा सीटों में से कांग्रेस को केवल नौ सीटें मिली हैं जबकि पुडुचेरी में उसे लड़ने के लिए सिर्फ एक सीट दी गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर की तीन लोकसभा सीटों के लिए गठबंधन किया है और तीन अन्य सीटों पर दोस्ताना चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) ने 8 सीटें पाने के लिए काफी मोलभाव किया है और कांग्रेस 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और राज्य में पहले ही जेडी(एस) के मुख्यमंत्री है।

महागठबंधन में दरारें आ चुकी हैं। झारखंड में 14 लोकसभा सीटें हैं। कांग्रेस को सात सीटें, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को चार, झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) को दो और लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली आरजेडी को एक सीट दी गई थी। आरजेडी ने सीटों के इस बंटवारे पर आपत्ति जताई और चतरा से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया जबकि यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आई थी। झारखंड में सीट बंटवारे के समझौते के अगले दिन ही आरजेडी की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी भाजपा में शामिल हो गईं। महाराष्ट्र में कांग्रेस 26 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अपने लिए 22 सीटें हासिल करने में कामयाब रही है। एनसीपी के साथ गठबंधन के कारण कांग्रेस में आंतरिक कलह चल रही है और कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण भी इससे नाराज़ हैं।

जहां तथाकथित महागठबंधन को लेकर पूरी तरह से अनिश्चितताएं हैं, वहीं एनडीए के पास पहले से ही39 राजनीतिक दलों का समर्थन है। एनडीए की एकता तभी नज़र आ गई थी जब उन्होंने बिहार की लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा एक साथ की थी। गुजरात के गांधी नगर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नामांकन के समय भी पूरी ताकत का प्रदर्शन किया गया। भाजपा पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ और महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। ये दोनों ही भाजपा के वर्षों पुराने सहयोगी हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता का विश्लेषण यह बताता है कि चुनाव पूर्व परिदृश्य में महागठबंधन खंड-खंड है और नेतृत्वहीन है। एनडीए की तुलना में अखिल भारतीय स्तर पर महागठबंधन की मौजूदगी भी वैसी नहीं है, जैसे एनडीए के सभी सहयोगी केवल एक नेता को आगे करके रैलियां कर रहे हैं और वो नेता हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। महागठबंधन में शामिल दल कई राज्यों में अलग-अलग चुनाव लड़ सकते हैं और जम्मू-कश्मीर और झारखंड जैसे राज्यों में उनके बीच दोस्ताना लड़ाई भी होगी, यह सीटों के बंटवारे को लेकर किसी भी तरह का समझौता कर पाने में मिली शर्मनाक विफलता के अलावा और कुछ भी नहीं है।

राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता का विश्लेषण यह बताता है कि चुनाव पूर्व परिदृश्य में महागठबंधन खंड-खंड है और नेतृत्वहीन है। एनडीए की तुलना में अखिल भारतीय स्तर पर महागठबंधन की मौजूदगी भी वैसी नहीं है, जैसे एनडीए के सभी सहयोगी केवल एक नेता को आगे करके रैलियां कर रहे हैं और वो नेता हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। महागठबंधन में शामिल दल कई राज्यों में अलग-अलग चुनाव लड़ सकते हैं और जम्मू-कश्मीर और झारखंड जैसे राज्यों में उनके बीच दोस्ताना लड़ाई भी होगी, यह सीटों के बंटवारे को लेकर किसी भी तरह का समझौता कर पाने में मिली शर्मनाक विफलता के अलावा और कुछ भी नहीं है। महागठबंधन का यह शोरशराबा केवल एक ढोंग है और मोदीवाद के विरोध का ये हौआ इस लोकसभा चुनाव से ज्यादा आगे नहीं बढ़ने वाला।